षट्तिला एकादशी क्या है और इसका क्या महत्व है?
हिन्दू पंचांग के अनुसार माघ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को षट्तिला एकादशी कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत का विशेष महत्व होता है। 'षट्तिला' शब्द का अर्थ है - छह प्रकार से तिलों का उपयोग। इस दिन धार्मिक और आयुर्वेदिक दोनों दृष्टियों से तिल का अत्यधिक महत्व माना गया है।
षट्तिला एकादशी पर तिलों के 6 प्रमुख उपयोग
इस पवित्र दिन पर छह अलग-अलग तरीकों से तिल का उपयोग करने से सभी पापों का नाश होता है:
- स्नान: पानी में काले या सफेद तिल डालकर स्नान करना।
- उबटन: तिलों का लेप या उबटन शरीर पर लगाना।
- तर्पण: जल में तिल मिलाकर पितरों का तर्पण और अर्घ्य देना।
- यज्ञ/होम: अग्नि में तिल की आहुति देकर हवन या यज्ञ करना।
- दान: ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को तिलों का दान करना।
- भोजन: तिलों को प्रसाद या भोजन के रूप में ग्रहण करना।
नोट: तिलों की महिमा अपनी जगह है, लेकिन अत्यधिक मात्रा में तिल न खाएं। विशेषकर रात के समय तिल या तिल से बनी भारी चीजें खाना वर्जित माना गया है।
आयुर्वेद में तिल के तेल के चमत्कारिक लाभ
आयुर्वेद में तेलों में तिल का तेल सर्वश्रेष्ठ माना गया है। यह वात और कफ को शांत करने वाला, बलकारक और त्वचा के लिए अत्यंत हितकारी है:
- यह शरीर के सूक्ष्म स्रोतों में प्रवेश कर दोषों को जड़ से उखाड़ता है और टूटी हुई हड्डियों व स्नायुओं को मजबूती देता है।
- तिल के तेल की मालिश करने से थकान दूर होती है, शरीर में स्फूर्ति आती है और अकाल बुढ़ापा (झुर्रियां) दूर रहता है।
- नियमित मालिश से अत्यधिक मोटे व्यक्तियों का वजन नियंत्रित होने में और दुबले व्यक्तियों का वजन संतुलित रहने में मदद मिलती है।
तिल के तेल के घरेलू और औषधीय प्रयोग
- मुंह और दांतों के लिए: 10 से 15 मिनट तक मुंह में तिल का तेल रखकर कुल्ला (ऑयल पुलिंग) करने से होंठ नहीं फटते, गला नहीं सूखता, आवाज सुरीली होती है और हिलते हुए दांत मजबूत होते हैं।
- जोड़ों और कमर का दर्द: 50 ग्राम तिल के तेल में 1 चम्मच सोंठ पाउडर और मटर के दाने जितनी हींग मिलाकर हल्का गर्म करके मालिश करने से कमर दर्द और जोड़ों के दर्द में आराम मिलता है।
- कान का दर्द: 20-25 लहसुन की कलियों को 250 ग्राम तिल के तेल में अच्छी तरह उबाल लें। इस तेल की कुछ बूंदें कान में डालने से दर्द से राहत मिलती है।
- बालों की देखभाल: प्रतिदिन सिर में शुद्ध तिल के तेल से मालिश करने से बाल हमेशा मुलायम, काले और घने रहते हैं तथा बाल समय से पहले सफेद नहीं होते।
- घाव भरना: सामान्य घाव या कटने पर तिल का तेल लगाने से घाव जल्दी भर जाते हैं।
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