थ्री इडियट्स का फुनसुक वांगड़ू, जंतर-मंतर का अनशन और आमिर खान पर पॉलिटिक्स: क्या है पूरा खेल, बॉस?
संसद का सत्र सिर पर है बॉस, और दिल्ली की सियासत में एक नया चैप्टर खुल गया है। इस बार केंद्र में हैं लद्दाख के सोनम वांगचुक, जो जंतर-मंतर पर अनशन पर बैठे हैं। लेकिन इस गंभीर आंदोलन के बीच अचानक एंट्री हो गई है बॉलीवुड के 'मिस्टर परफेक्टनिस्ट' आमिर खान की।
अब आप सोच रहे होंगे कि भाई, पेपर लीक और लद्दाख के मुद्दे के बीच में आमिर खान कहां से आ गए? तो चलिए, आज इस पूरे विवाद का एक-एक अध्याय खोलते हैं और समझते हैं कि इसके पीछे की इनसाइड स्टोरी क्या है।
आमिर खान और नसीरुद्दीन शाह की 'टेररिंग'!
बॉस, इस पूरे खेल में विपक्ष की तरफ से एक नया नैरेटिव सेट करने की कोशिश हो रही है। कांग्रेस के नेता पूछ रहे हैं कि—"भैया, आमिर खान ने 'थ्री इडियट्स' फिल्म में सोनम वांगचुक से प्रेरित रोल निभाया, फिल्म सुपरहिट रही, तो अब वो वांगचुक के समर्थन में आगे क्यों नहीं आ रहे हैं? आमिर खान को भी नसीरुद्दीन शाह की तरह निडर होना चाहिए, सरकार की गलत बातों पर बोलना चाहिए, वो डर क्यों रहे हैं?"
मतलब कमाल है बॉस! कांग्रेस के हिसाब से अगर सोनम वांगचुक फिल्म के 'फुनसुक वांगड़ू' नहीं भी थे, तब भी आमिर खान को जबरदस्ती आकर बोल देना चाहिए था कि—"हां भाई, ये रोल तो वांगचुक का ही था!"
सियासत का तमाशा देखिए, खुद सोनम वांगचुक और फिल्म के डायरेक्टर राजकुमार हिरानी पहले ही साफ़ कर चुके हैं कि यह किरदार वांगचुक पर बेस्ड नहीं था। लेकिन सोशल मीडिया पर माहौल ऐसा बनाया जा रहा है जैसे आमिर खान कोई गुनाह कर रहे हों।
अगर वो 'वांगड़ू' नहीं, तो क्या उनकी कोई वैल्यू नहीं?
अब आते हैं सबसे बड़े और पते के सवाल पर। मान लिया कि सोनम वांगचुक 'थ्री इडियट्स' के फुनसुक वांगड़ू नहीं हैं, तो क्या इसका मतलब यह है कि वो कुछ भी नहीं हैं? क्या जंतर-मंतर पर उनके 20 दिन के अनशन की कोई वैल्यू नहीं रह गई?
बॉस, मुद्दा एकदम सीधा है। वो नीट (NEET) परीक्षा और पेपर लीक के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। देश में पेपर लीक रुकना चाहिए—इस मुद्दे से इस देश में किसी को कोई ऐतराज हो सकता है क्या? बिल्कुल नहीं! तो फिर इसके लिए उनका 'फुनसुक वांगड़ू' होना क्यों जरूरी है?
ज़रा सोनम वांगचुक का असली प्रोफाइल देखिए बॉस:
वो मैकेनिकल इंजीनियर हैं और फ्रांस से अर्थ आर्किटेक्चर की पढ़ाई कर चुके हैं।
1988 से लद्दाख के मशहूर 'SECMOL' आंदोलन के फाउंडिंग डायरेक्टर रहे हैं।
जम्मू-कश्मीर की शिक्षा नीति बनाने वाली कमेटी के मेंबर रहे हैं।
साल 2018 में उन्हें प्रतिष्ठित रमन मैग्सेसे अवार्ड से सम्मानित किया गया था।
लद्दाख में पानी की कमी दूर करने के लिए 'आइस स्तूपा' (Ice Stupa) तकनीक बनाने का क्रेडिट उन्हें जाता है।
लद्दाख में गर्मियों में पानी की भारी किल्लत होती है। वांगचुक ने सर्दियों में बेकार बहने वाले पानी को पाइप के जरिए मोड़कर, उसे फ्रीजिंग टेम्परेचर में 'बर्फ के पहाड़ों' (स्तूप के आकार में) में बदल दिया। ये स्तूप गर्मियों में धीरे-धीरे पिघलते हैं और किसानों को खेती के लिए पानी मिलता है। यह एक ग्लोबल लेवल का पर्यावरण नवाचार (Environmental Innovation) है।
तो भाई, जिस आदमी का काम इतना शानदार है, उसे किसी फिल्मी कैरेक्टर के सर्टिफिकेट की क्या ज़रूरत है?
काम शानदार, लेकिन विवाद भी दमदार!
लेकिन बॉस, सिक्का हमेशा दोनों तरफ से देखा जाता है। सोनम वांगचुक का काम जितना बड़ा है, उनका विवादों से नाता भी उतना ही गहरा रहा है।
उनकी संस्थाओं पर सरकारी नियमों के उल्लंघन और संदिग्ध फंडिंग के आरोप लगे हैं।
गृह मंत्रालय ने उनकी संस्था का FCRA रजिस्ट्रेशन तक कैंसिल कर दिया था।
साल 2025 में लद्दाख में हुई हिंसा के सिलसिले में उन पर गंभीर आरोप लगे और उन्हें NSA (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) के तहत जेल भी जाना पड़ा था।
अब मजे की बात देखिए बॉस, यूपीए के ज़माने की भी एक चिट्ठी तैर रही है जिसमें खुद कांग्रेस की सरकार ने कहा था कि इनका 'चीन से कुछ कनेक्शन' है। अब पब्लिक सोच रही है कि भाई, अगर चीन से कनेक्शन था और वो देशद्रोही थे, तो 2007 से लेकर 2026 तक का इंतजार क्यों हो रहा है? उन्हें तभी जेल में क्यों नहीं डाला गया?
ये 'कन्वीनियंट' राजनीति बंद होनी चाहिए!
हमारा पॉइंट बिल्कुल साफ़ है बॉस। सोनम वांगचुक फिल्म में थे या नहीं, इससे नीट (NEET) के पेपर लीक का मुद्दा न तो छोटा होता है और न बड़ा। उनके कुछ बयान विवादित हो सकते हैं, इसमें कोई दो राय नहीं। लेकिन उनका काम भी बड़ा है, इसमें भी कोई दो राय नहीं।
विपक्ष को आंदोलन में अपनी सियासत चमकाने का मौका दिख रहा है, इसलिए वो वहां चक्कर काट रहे हैं। लेकिन एजेंसी और सरकार का हिसाब भी बड़ा अजीब है—अनशन के 20वें दिन अचानक किसी को देशद्रोही मत बताइए। अगर गुनाहगार हैं, तो उठाइए और अंदर डालिए। राजनीति के हिसाब से 'जरूरत पड़ने पर देशद्रोही और जरूरत न होने पर बाहर घूमने की आज़ादी'—ये ढुलमुल रवैया नहीं चलेगा बॉस!
सियासत के मंच पर ये खेल चल रहा है और जनता सब देख रही है।
आप इस बारे में क्या सोचते हैं बॉस? कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर बताइए!
Source - Desh ki Pathshala News18india shows

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